हिंदी ट्वीटस (शहीदी दिवस)
जिंदगी तो अपने दम पर ही जी जाती है, दूसरों के कंधो पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं | #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
“मेरा धर्म देश की सेवा करना है।” सरदार भगत सिंह
किसी को ‘क्रांति’ शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब से इसे अलग अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं। #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
कोई भी व्यक्ति जो जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार खड़ा हो उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमे अविश्वास करना होगा और चुनौती भी देना होगा।
किसी भी इंसान को मारना आसान है, परन्तु उसके विचारों को नहीं। महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं, जबकि उनके विचार बच जाते हैं। #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
व्यक्तियो को कुचल कर , वे विचारों को नहीं मार सकते।
सामाजिक प्रगति कुछ के विकास पर नहीं बल्कि लोकतंत्र के संवर्धन करती है
किसी भी कीमत पर बल का प्रयोग ना करना काल्पनिक आदर्श है | #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
हवा में रहेगी, मेरे ख्याल की बिजली, ये मुस्ते खाक है फानी रहे, रहे न रहे |
क़ानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है जब तक की वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे।
क्रांति मानव जाती का एक अपरिहार्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक कभी न ख़त्म होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है।
निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम् लक्षण हैं।
#Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवसजिंदा रहने की ख्वाहिश कुदरती तौर पर मुझमें भी होनी चाहिए । मैं इसे छिपाना नहीं चाहता, लेकिन मेरा जिंदा रहना एक शर्त पर है । मैं कैद होकर या पाबंद होकर जिंदा रहना नहीं चाहता ।
दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उलफत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए वतन आएगी ।
अपने दुश्मन से बहस करने के लिये उसका अभ्यास करना बहुत जरुरी है।
क्रांति लाना किसी भी इंसान की ताकत के बाहर की बात है। क्रांति कभी भी अपनेआप नही आती। बल्कि किसी विशिष्ट वातावरण, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में ही क्रांति लाई जा सकती है।
क्रांतिकारी सोच के दो आवश्यक लक्षण है – बेरहम निंदा तथा स्वतंत्र सोच। #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते हैं। क्रान्ति की तलवार विचारों के धार बढ़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है।
सिने पर जो ज़ख्म है, सब फूलों के गुच्छे हैं, हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं।
महान आवश्यकता के समय, हिंसा अनिवार्य हैं
जन संघर्ष के लिए, अहिंसा आवश्यक हैं
लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका कल आगाज आएगा | मेरे लहू का हर कतरा इंकलाब लाएगा, मैं रहूँ या न रहूँ पर यह वादा है तुमसे मेरा की मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा | #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज्बातों से अगर मैं इश्क लिखना भी चाहूँ तो इंकलाब लिखा जाता है
मुझे कभी भी अपनी रक्षा करने की कोई इच्छा नहीं थी, और कभी भी मैंने इसके बारे में गंभीरता से नहीं सोचा।
क्रांति की तलवारें तो सिर्फ विचारों की शान से तेज की जाती हैं।
हमें यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्रांति का मतलब केवल उथल-पुथल या ए क प्रकार का संघर्ष नहीं है।
क्रांति आवश्यक रूप से मौजूदा मामलों (यानी, शासन) के पूर्ण विनाश के बाद नए और बेहतर रूप से अनुकूलित आधार पर समाज के व्यवस्थित पुनर्निर्माण के कार्यक्रम का अर्थ है।
विद्रोह कोई क्रांति नहीं है। यह अंततः उस अंत तक ले जा सकता है।
अपने देश की तुलना में सूर्य अपनी यात्रा में अधिक स्वतंत्र, अधिक खुश, अधिक प्यारा कहीं ओर नहीं हो सकता #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
बुराई इसलिए नहीं बढ़ रही है कि बुरे लोग बढ़ गए है बल्कि बुराई इसलिए बढ़ रही है क्योंकि बुराई सहन करने वाले लोग बढ़ गये है
किस तरह से भगवान पर विश्वास करने वाला व्यक्ति अपने निजी घमंड के कारण विश्वास करना बंद कर सकता है? केवल दो तरीके हैं। आदमी को या तो खुद को भगवान का प्रतिद्वंद्वी समझना शुरू कर देना चाहिए, या वह खुद को भगवान मानना शुरू कर सकता है।
लोग चीजों के स्थापित क्रम के आदी हो जाते हैं और परिवर्तन के विचार पर कांप जाते हैं। यह इस सुस्त भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की जरूरत है #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
मैं इस विषय पर जोर देता हूँ कि मैं महत्वकांशा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ। परन्तु मैं आवश्यकता पड़ने पर यह सब त्याग/छोड़ भी सकता हूँ, और वही सच्चा बलिदान है।
कुछ लोग आम तौर पर चीजें जैसी होती है उसके आदि हो जाते हैं, और बदलाव के विचार या बात से ही डर कर कांपने लगते हैं। हम लोगों को इसी निष्क्रियता की भावना को क्रन्तिकारी भावना में बदलने की आवश्यकता है। #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
मैं इस बात को समझने में पूरी तरह से विफल रहा हूं कि किस तरह से गर्व या व्यर्थ-गौरव कभी भी ईश्वर में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रास्ते में खड़े हो सकते हैं।
जो लोग अपने देश के लिए मरते हैं वे शहीद होते हैं और जो अपने देश के लिए जीते हैं वे अधिक शहीद होते हैं।
क्रांति जीवन और मृत्यु, पुराने और नए, प्रकाश और अंधेरे के बीच शाश्वत संघर्ष का महत्वपूर्ण जीवित बल संकेत था #Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवस
खुदा के आशिक हजारों हैं, वनों में फिरते हैं मारे-मारे, मैं उसका बंदा बनूंगा जिसको खुदा के बंदों से प्यार होगा।
हँसते-हँसते चढ़ा वो फांसी उसका भी तो जमीर था हर नौजवान है कायल जिसका, शहीद-ए-आज़म भगत सिंह वो वीर था
हमारे लिए, कभी भी समझौते का मतलब आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि एक कदम आगे और कुछ आराम है। वह सब है और कुछ नहीं।
मनुष्य तभी कार्य करता है जब वह अपने कार्य की न्यायप्रियता के बारे में सुनिश्चित हो।
श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है
सार्वभौमिक भाईचारा तभी प्राप्त किया जा सकता है जब अवसर की समानता हो - सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन में अवसर की
प्यार हमेशा इंसान के चरित्र को ऊँचा उठाता है। यह उसे कभी कम नहीं करता है, बशर्ते कि प्यार प्यार हो|
#Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवसजीवन का उद्देश्य मन को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि इसे सामंजस्यपूर्ण रूप से विकसित करना है; इसके बाद यहाँ मोक्ष प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि नीचे इसका सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए|
#Bhagatsingh #ShaheedDiwas #Sukhdev #MartyersDay #शहीद_दिवससत्य और सौंदर्य केवल चिंतन में अच्छा होने का एहसास नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन के वास्तविक अनुभव में भी होना चाहिए|
महान आवश्यकता के समय में, हिंसा अपरिहार्य है।
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