Friday, 4 March 2022

स्वामी श्रद्धानन्द ट्वीट्स in Hindi / social media posts Hindi

हिंदी ट्वीटस / posts

स्वामी श्रद्धानंद का जन्म 22 फरवरी सन् 1856 (फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी, विक्रम संवत् 1913) को पंजाब प्रान्त के जालंधर जिले के पास बहने वाली सतलुज नदी के किनारे बसे तलवन नगरी में हुआ था। #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद का बचपन का नाम मुंशीराम था| 

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‘स्वामी श्रद्धानंद की याद आते ही 1919 का दृश्य आंखों के आगे आ जाता है। सिपाही फ़ायर करने की तैयारी में हैं। स्वामी जी छाती खोल कर आगे आते है और कहते है- ‘लो चलाओ गोलियां‘। इस वीरता पर कौन मुग्ध नहीं होगा? - लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद वीर सैनिक थे। वीर सैनिक रोग शैय्या पर नहीं, परंतु रणांगण में मरना पसंद करते हैं। वह वीर के समान जीये तथा वीर के समान मरे‘ - महात्मा गांधी #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद द्वारा देश की समस्याओं तथा हिंदोद्धार पर आधारित ‘हिंदू सॉलिडेरिटी-सेवियर ओफ़ डाइंग रेस‘ अर्थात् ‘हिंदू संगठन – मरणोन्मुख जाति का रक्षक’ नामक पुस्तक लिखी गयी जो आज भी लोगों का मार्गदर्शन करती है| #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद ने स्वराज्य हासिल करने, देश को अंग्रेजी दासता से छुटकारा दिलाने और विधर्मी बने हिंदुओं का शुद्धिकरण करने का कार्य किया| #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद ने दलितों को उनका अधिकार दिलाने और पश्चिमी शिक्षा की जगह वैदिक शिक्षा प्रणाली गुरुकुल के मुताबिक शिक्षा का प्रबंध करने जैसे अनेक कार्य करने मे योगदान दिया |


स्वामी श्रद्धानंद ने गुरुकुल की स्थापना करके देश में पुन: वैदिक शिक्षा की शुरुआत की | #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद ने महर्षि दयानंद द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार कर उन्हें कार्यरूप में परिणित किया और उनके जरिए देश, समाज और स्वाधीनता के कार्यों को आगे बढ़ाने का युगांतरकारी कार्य किए।


स्वामी श्रद्धानंद जी ने ही गाँधी को सबसे पहले ‘महात्मा’ कहकर सम्बोधित किया था जो आगे चलकर उनके नाम के साथ जुड़ गया | #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद ने 30 मार्च, 1919 को चांदनी चौक, दिल्ली में रौलट एक्ट के विरुद्ध हुए सत्याग्रह का नेतृत्व किया | #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद जी द्वारा हरिद्वार के पास 24 मार्च, 1902 ‘गुरुकुल कांगड़ी’ की स्थापना की गयी | #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद ने दलितों की भलाई के लिए कार्य किया तथा  साथ ही कांगेस के स्वाधीनता के आंदोलन का 1919 से लेकर 1922 तक नेतृत्व भी किया। 


स्वामी श्रद्धानंद ने जालन्धरऔर देहरादून में कन्या पाठशाला की स्थापना की| #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद ने लौकिक शिक्षा और पूर्वजों की महान परंपरा की शिक्षा को सभी जाति के विद्यार्थियों के लिए शिक्षण संस्थानों में प्रचलित किया| #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद ने वर्ष 1919 में दिल्ली की जामा मस्जिद में पहले वेद मंत्र पढ़े और एक प्रेरणादायक भाषण दिया। मस्जिद में वेद मंत्रों का उच्चारण करने वाले भाषण देने वाले स्वामी श्रद्धानंद एकमात्र व्यक्ति थे।


30  मार्च 1919 को दिल्ली के चांदनी चौक स्थित घंटाघर पर फिरंगियों के सामने छाती को तानकर कहा था कि ‘चलाओ गोली, भारत की जनता पर गोली चलाने के पूर्व तुम्हें इस संन्यासी की छाती को छलनी करना होगा,


स्वामी श्रद्धानंद अग्रिम पंक्ति के स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक चिन्तक, विद्वान, पत्रकार, लेखक, वक्ता और कुशल संगठनकर्ता थे | #SwamiSradhhanand


स्वामी श्रद्धानंद ने स्वामी दयानंद के विचारों का प्रचार करने के लिए ‘सदधर्मप्रचारक’ नाम से साप्ताहिक अखबार शुरू किया।

 

स्वामी श्रद्धानंद ने 'हिंदू संगठन: सेविंग ऑफ़ डाइंग रेस' नामक एक पुस्तक लिखी | #SwamiSradhhanand


 स्वामी श्रद्धानंद का मिशन वैदिक धर्म का प्रचार करना था और वह अपने रास्ते से कभी नहीं हटे।


स्वामी श्रद्धानंद ने स्वामी दयानंद सरस्वती की बहुमूल्य शिक्षाओं का प्रचार किया और 1920 के शुद्धि और संगठन आंदोलन में एक प्रमुख भूमिका निभाई


स्वामी श्रद्धानंद ने निचली जातियों के अधिकारों की रक्षा की और 'दलित उद्धारक सभा' ​​की स्थापना की, जिसने अछूतों के कल्याण के लिए काम किया। #SwamiSradhhanand


 1889 में  स्वामी श्रद्धानंद ने अखबार सदधर्मप्रचारक में महिलाओं की शिक्षा के संबंध में कई लेख लिखे। #SwamiSradhhanand

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव हेडगेवार के घर में कुछ महापुरुषों के चित्र लगे थे जिनमें एक स्वामी श्रद्धानंद का भी चित्र था| #SwamiSradhhanand


बालिकाओं की पढ़ाई के लिए स्वामी श्रद्धानंद ने जालंधर में विद्यालय की स्थापना की | #SwamiSradhhanand


जात-पात व ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर समग्र समाज के कल्याण के लिए स्वामी श्रद्धानंद ने अनेक कार्य किए। #SwamiSradhhanand

महर्षि दयानंद के देहांत के बाद स्वामी श्रद्धानंद ने स्वयं को स्वदेश, स्व-संस्कृति, स्व-समाज, स्व-भाषा, स्व-शिक्षा, नारी कल्याण, दलितोत्थान, स्वदेशी प्रचार, वेदोत्थान, पाखंड खडंन, अंधविश्‍वास उन्मूलन और धर्मोत्थान के कार्यों को आगे बढ़ाने मे पूर्णत समर्पित कर दिया 


लाहौर में वकालत पढ़ते वक्त स्वामी श्रद्धानंद का सम्पर्क आर्य समाज से हुआ था| समय मिलने पर या रविवार को गाँवों में वेदों के प्रचार के लिए निकल जाते थे |


23 दिसम्बर, 1926 को चांदनी चौक, दिल्ली में अब्दुल रशीद नाम के व्यक्ति ने स्वामी श्रद्धानंद जी की गोली मारकर हत्या कर दी। #SwamiSradhhanand

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