रानी अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 1725 में मध्यप्रदेश के वर्तमान अहमदनगर जिले के जामखेड़ तहसील के चौंडी ग्राम में मणकोजी शिंदे के घर में हुआ।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर का विवाह खंडेराव होलकरजी से सन १७३३ में हुआ। खंडेराव होलकरजी, मल्हार राव होल्कर जी के बेटे थे जो कि मराठा सरदारों में एक ताकतवर सरदार माने जाते थे।
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क्षिप्रा नदी के किनारे छोटी अहिल्यादेवी सहेलियों के साथ रेत का शिवलिंग बनाकर खेल रही थी, पेशवा की सेना का अश्व उनकी ओर दौड़ा | वो बिना घबराए अपने बनाए शिवलिंग के साथ बैठी रही, मल्हाररावजी होल्कर ने उनके साहस से प्रभावित होकर अपनी बहू बनाने का निर्णय लिया।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर अपने ससुर , पति और अपने बेटे की मृत्यु के बाद रघुनाथराव को कूटनीति से बिना युद्ध किए रघुनाथराव को वापस लौटा दिया और इसके साथ अहिल्यादेवी का कद और बढ़ा।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर ने भारत के भिन्न-भिन्न भागों में अनेक मन्दिरों, धर्मशालाओं और अन्नसत्रों का निर्माण कराया था|
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रानी अहिल्याबाई होल्कर के कुशल नेतृत्व व प्रशासन के कारण प्रजा ने उन्हें देवी की उपाधि दी। जिसके बाद उन्हें अहिल्यादेवी होलकर पुकारा जाने लगा।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर सनातनी हिन्दुत्वनिष्ठ महारानी के रूप में विख्यात हुईं। उन्होंने अपने शासनकाल में अनेक धार्मिक कार्यों को पूरा किया।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर न्याय के प्रति बहुत सजग रहती थीं। उन्होंने अपने राज्य में नियमबद्ध न्यायालय बनवाये थे। गाँवों में पंचायत को न्यायदान के व्यापक अधिकार दिये थे।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर ने महिला सशक्तिकरण के लिए विधवा महिलाओं को हक दिलवाने के लिए कानून में बदलाव किया। विधवा महिलाओं को उनके पति की संपत्ति को हासिल करने का अधिकार दिलावाया।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर के शासन में इंदौर एक छोटे से गांव से शहर में स्थापित हो गया। मालवा में किले, सड़कें बनवाने का श्रेय अहिल्याबाई को ही जाता है
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रानी अहिल्याबाई होल्कर ने द्वारिका, रामेश्वर, बद्रीनारायण, सोमनाथ, अयोध्या, जगन्नाथ पुरी, काशी, गया, मथुरा, हरिद्वार, आदि स्थानों पर कई प्रसिद्ध एवं बड़े मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया और धर्मशालाओं का निर्माण करवाया।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर ने अयोध्या और नासिक में भगवान राम के मंदिर का निर्माण किया, उज्जयिनी में चिंतामणि गणपति मंदिर का निर्माण किया, सोमनाथ के मंदिर का पुनर्निर्माण किया, जगन्नाथपुरी मंदिर को दान दिया |
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रानी अहिल्याबाई होल्कर परम शिवभक्त थीं उन्होंने अपने शासनकाल में सिक्कों पर ‘शिवलिंग और नंदी’ अंकित करवाए ।#अहिल्याबाई_होल्कर #AhilyabaiHolkar
रानी अहिल्याबाई होल्कर के ऐतिहासिक शासनकाल के आधार पर ही भारत सरकार ने सम्मान में 25 अगस्त, 1996 को उनके नाम पर एक डाक टिकट जारी किया।#अहिल्याबाई_होल्कर #AhilyabaiHolkar
रानी अहिल्याबाई होल्कर न्याय के प्रति बहुत सजग रहती थीं। उन्होंने अपने राज्य में नियमबद्ध न्यायालय बनवाये। गाँवों में पंचायत को न्यायदान के व्यापक अधिकार दिये थे।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर ने कलकत्ता से काशी तक सड़क निर्माण करवाया। इसके अलावा उन्होनें गया में विष्णु मन्दिर व काशी (वाराणसी) में अन्नपूर्णा मन्दिर बनवाए।
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1783 में देवी रानी अहिल्याबाई होल्कर ने डाक व्यवस्था की शुरूआत की। महेश्वर से पुणे तक डाक व्यवस्था चलाने का दायित्व पदमसी नेन्सी नामक कम्पनी को सौंपा गया था।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर ने बद्रीनारायण से लेकर रामेश्वर तक, द्वारका से लेकर भुवनेश्वर तक अनेक मन्दिरों का पुनर्निर्माण करवाया।
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रानी अहिल्याबाई होल्कर के राज्य में बुनकर उद्योग को प्रोत्साहन स्वरूप अन्न, वस्त्र, निवास, उद्योग के लिए धन एवं तैयार कपड़ा बेचने की भी व्यवस्था हुई।
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