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काल स्वयं मुझसे डरा है,
मैं काल से नहीं।
काले पानी का कालकूट पीकर,
काल के कराल स्तंभों को झकझोर कर,
मैं बार-बार लौट आया हूं,
और फिर भी मैं जीवित हूँ।
हारी मृत्यु है,मैं नहीं...
असंख्य अमानवीय यातनाएं सहते हुए राष्ट्र आराधना में अपना जीवन अर्पित करने वाले माँ भारती के अमर सपूत, युगद्रष्टा, 'स्वातंत्र्यवीर' विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
महात्मा गाँधी का वीर सावरकर से रिश्ता बहुत पुराना था। वे एक-दूसरे से साल 1909 में विजयादशमी के दिन लंदन में पहली बार मिले थे।
#वीरसावरकर
भारत को सावरकर के त्याग और देशभक्ति का बहुत जल्दी फायदा मिलेगा।- महात्मा गाँधी, साल 1909, विजयादशमी दिवस
#वीरसावरकर
वीर सावरकर का निधन राष्ट्रीय महत्व का विषय है, संसद सदस्यों को उनकी संवेदनाएं पेश करने देना चाहिए। मगर ऐसा नहीं होने दिया, जोकि अनसुना एवं अकल्पनीय है।- एच. एन. मुखर्जी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया
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साल 1973 में लोकसभा में जनता पार्टी के सदस्य, मुख्तियार सिंह मलिक ने तत्कालीन गृह मंत्री से प्रश्न किया, “क्या भारत सरकार ने दिवंगत स्वातंत्र्यवीर सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मान्यता देने का कोई निर्णय लिया है?” जवाब में गृह मंत्री, उमाशंकर दीक्षित ने कहा, “जी महोदय।
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